रन्ग बिरन्गी देह हमारी
रन्ग बिरन्गी देह हमारी भरे पेट मै फाहा जाडे की कठिन रातो मै सब ने मुझको चाहा
200 पहेलियां मिलीं
हँसाने वाली मजेदार पहेलियां
रन्ग बिरन्गी देह हमारी भरे पेट मै फाहा जाडे की कठिन रातो मै सब ने मुझको चाहा
धरती से निकला दरख्त एक पात नही पर डाली अनेक इस दरख्त की ऐसी छाया जिसमे कोई बेठ न पाया
मै हू एक पवित्र धाम तीन अक्षर का मेरा नाम प्रथम कटे तो दुख हो जाऊ अन्त कटे तो साथ मै जाऊ
काली गुणवाली बडी रहती मै डाल पर डोल जब मस्ती मै बोलती मिक्ष्री सी देती हू घोल
चार खूट का नगर बसाया चार कुए बिन पानी चोर अठारह नगर मै बेठे लेके साथ मै रानी
प्रथम कटे मर जाऊ पानी सदा पेट मे लाऊ अन्त कटे मै गिला करू बर्तनो मै मिला करू
रन्ग बिरन्गा गोल शरीर करता सदा हवा से बात भोजन इसका बडा निराला खाता हवा ओर सो-सो लात
बेल पडी तालाब मै फूल खिलाती जाय एक अचम्भा देखो भेया फूल बेल को खाय
प्रथम कटे टाई बन जाए कोई न उसको गले लगाए बिछने के आती वो काम जल्द बताओ उसका नाम
एक पेर का काला मेढक वर्षा-ऋतु मै आता हे खूब बरसता हे जब पानी उपयोगी बन जाता हे
बन मे दिखती हे वो छेली उसके पेट मे लटके थेली बच्चे को थेली मे छिपाए वन मे लम्बी कूद लगाए
बन मे दिखती हे वो छेली उसके पेट मे लटके थेली बच्चे को थेली मे छिपाए वन मे लम्बी कूद लगाए
सुन्दर सुन्दर ख्वाब दिखाती पास सभी के रात मै आती थके मान्दे को दे आराम जल्द बताओ उसका नाम
सापो से भरी एक पिटारी सबके मुख पर भरी चिन्गारी तन कर सोए, नही वो लटके फेके आग जो मुह को पटक
काली गुणवाली बडी रहती मै डाल पर डोल जब मस्ती मै बोलती मिक्ष्री सी देती हू घोल
मै हू एक पवित्र धाम तीन अक्षर का मेरा नाम प्रथम कटे तो दुख हो जाऊ अन्त कटे तो साथ मै जाऊ
दो अक्षर का शब्द हे एक नाम एक हे किस्म अनेक नर नारी सबके मन भावे खाने वाला नीच कहावे
बिन पानी रूप न ले पानी से गल जाय आग लगाकर फूक दे अजर अमर हो जाय
हाड नही मास नही अगुलिया हे मेरी ओ ग्यानी झ्ट नाम बता परखू अक्कल तेरी
बिजली खाऊ बटन दबवाऊ यन्त्रो का हू नेता काज गणित या लेखन का पल मै सब कर देता