मेहमानों का स्वागत मुझसे
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप है पतली काया दूध और पानी भी है समाया वो खुश जिसने मुझको पाया
उत्तर:
उत्तर:- चाय
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप है पतली काया दूध और पानी भी है समाया वो खुश जिसने मुझको पाया
उत्तर:- चाय
चार अक्षर का नाम बतलाये। पर्याय एक गौत्र कहलाये।। औषधी के है काम आए। भैया अब तो दो बतलाए।।
एक पड़ी रेखा ,उसके ऊपर एक खड़ी रेखा | एक दोनों के ऊपर नीचे मिली रेखा | बताओ इसके क्या बने ,बनाने वा...
सारे तन में छेद कई हैं इन छेदों का भेद यही है ये ना हों तो मैं बेकार इनसे ही है मेरा संसार तब ही मैं...
मेरे नाम से रंग कहा जाता। साढ़े तीन अक्षर का नाम आता।। मेरा फल खाया है जाता। शरबत मे भी काम आता
सूखे क्षेत्र का फल सेब कहलाता। हर कोई है फल को चाय से खाता।। अजा ही पत्ते भूख मिटाते। लागे टेडे नुक...
ताले अड़तालीस डले थे, पहरेदार लिए भाले थे | भीतर बंद किया उन मुनि को, नाम बताओ तुम जन-जन को ||
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