दो अक्षर से मेरा नाता
दो अक्षर से मेरा नाता एक इशारे पर खुल जाता जब चाहो तब बंद हो जाता सावन, भादो याद में आता मर्जी ना हो तो भी मैं नहाता लेकिन मुझे बुखार न आता
उत्तर:
उत्तर:- छाता
दो अक्षर से मेरा नाता एक इशारे पर खुल जाता जब चाहो तब बंद हो जाता सावन, भादो याद में आता मर्जी ना हो तो भी मैं नहाता लेकिन मुझे बुखार न आता
उत्तर:- छाता
नहीं सुदर्शन चक्र मगर मैं चकरी जैसा चलता सिर के ऊपर उलटा लटका फर्श पे नहीं उतरता बर्फ नहीं पर हवा है...
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप है ...
तीन अक्षर के इस राज्य वृक्ष को, सभी ने है पवित्र माना।। प्रथम कटे समय , मध्य कटे फल, अन्त कटे मवाद ...
हिमालय में है मेरा वास। बनता हूं मैं तेरा निवास ।। फर्नीचर के भी काम आता। जो नष्ट करे वो पछताता।।
आगे प है मध्य में भी प अंत में इसके ह है कीट पतंग नहीं ये भैया न बिल्ली चूहा है वन में पेड़ों पर रहता...
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो प...
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी लिखें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करने वाले बनें!